चीन बढ़ा रहा अपने परमाणु हथियार, क्या यह भारत के लिए खतरे की घंटी है? 2030 तक नहीं लग रहे इरादे नेक।

तो दोस्तों जैसा कि आप सब जानते हैं कि चीन पूरे विश्व में एक गलत नीयत रखने वाला देश माना जाता है। चीन एक ऐसा देश है जिसकी ज्यादातर देशों से बनती नहीं है। क्योंकि चीन के इरादे कभी किसी देश के लिए नेक नहीं हुए जिसकी वजह से चीन से कोई देश दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाता है। क्योंकि चीन आए दिन कुछ ना कुछ खतरनाक बनाता रहता है, जो किसी भी देश के लिए सुरक्षित नहीं है। हालांकि, कुछ देश ऐसे हैं जो चीन से दोस्ती बनाए रखे हैं तो उनके लिए यह खतरे की बात नहीं है। लेकिन, जिन देशों की चीन से नहीं बनती है, उनके लिए यह ज़रूर चिंता की बात है और खतरे की भी। पड़ोसियों की जमीन पर बुरी नज़र रखने वाले चीन पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। आइए इस पर पूरी जानकारी जानते हैं।

ड्रैगन ने पिछले कुछ सालों में बहुत ही खामोशी से चुपके से अपने परमाणु हथियारों की तादात बढ़ाई है। और सिर्फ यही नहीं, चीन अपनी सेना पीएलए को मज़बूत और ताकतवर बनाने में जुटा है। हम आपको बता दें कि, चीनी सेना ऐसे–ऐसे हथियार बना रही है जो दुनिया के लिए काफी बड़ा खतरा हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के पास वर्तमान में लगभग 500 करीब परमाणु हथियार हैं। और सिर्फ यही नहीं, बल्कि चीनी सेना आगे के लिए यानि भविष्य के लिए और अधिक परमाणु हथियार के उत्पादन पर ज़ोर दे रही है। अगर दुनिया की महाशक्तियों की बात की जाए तो उनमें से एक चीन के पास वर्तमान में सबसे तेज़ी से बढ़ते परमाणु शस्त्रागार हैं। और अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन 2030 तक लगभग 1000 से भी ज़्यादा परमाणु हथियार बनाने का टारगेट तय कर चुका है। और इनमें से अधिकांश की तैनाती भी जल्द सुनिश्चित कर दी जाएगी।

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और हम आपको सबसे खास बात दें कि चीन की इस महत्वाकांक्षा से भारत और अमेरिका को सबसे ज़्यादा खतरा है। क्योंकि अगर देखा जाए तो चीन का सबसे बड़ा दुश्मन अमेरिका है और अगर उसके बाद कहें तो फिर भारत। बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स के 2024 न्यूक्लियर नोटबुक का अनुमान है कि चीनी सेना पीएलए इस वक्त खुद को मज़बूत करने में जुटा हुआ है। और चीनी सेना के इन खतरनाक हथियारों की वजह से सबसे ज़्यादा अमेरिका और भारत को ही खतरा है । क्योंकि सीमा विवाद को लेकर चीन हमेशा भारत से पंगा लेता रहा है। और इसके अलावा चीन की नज़र विश्व शक्ति का तमगा लिए अमेरिका पर भी रहती है। हम आपको बता दें कि पिछले अक्टूबर में अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपनी 2023 की वार्षिक रिपोर्ट में दो निष्कर्ष निकाले थे।

पहला, मई 2023 तक चीन के पास 500 से अधिक सक्रिय परमाणु हथियार हैं। जो कि पहले के अनुमान से अधिक है। 2022 की रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया था कि चीन का परमाणु हथियारों का भंडार 400 की संख्या को पार कर गया है। दूसरा, सेना को आधुनिक और मज़बूत बनाने की हवस में चीन 2030 तक 1000 से अधिक परमाणु हथियार बनाने की उम्मीद कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि चीन 2022 की तरह अपने परमाणु विस्तार की गति जारी रखता है तो, चीन के पास 2035 तक लगभग 1500 से भी ज़्यादा परमाणु हथियारों का ज़खीरा हो सकता है। यही वह समय सीमा है जब तक चीन सेना “ मूल रूप से पूर्ण आधुनिकीकरण” करने की योजना बना रही है। हम आपको बता दें कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले साल दिसंबर में रिपोर्ट किया था कि चीन “नई पीढ़ी के परमाणु हथियारों का परीक्षण ” करने के लिए एक सैन्य प्रतिष्ठान तैयार कर रहा है।

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आइए अब आपको यह बताते हैं कि यह सब करने से चीन को क्या फायदा हो रहा है। तो दोस्तों हम आपको बता दें कि आधुनिकीकरण की आड़ में चीन अपने परमाणु हथियारों के भंडार की तादात बढ़ा कर दुनिया के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि, चीन के परमाणु हथियारों के भंडार की तादात बढ़ने के पीछे दो वजहें मानी जा सकती हैं। पहला यह है, अन्य परमाणु संपन्न देशों के साथ विश्वसनीय प्रतिरोध बनाए रखना, और मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और भारत से। और दूसरा यह, परमाणु संपन्न देश के रूप में अपनी वैश्विक स्तिथि में सुधार करना।

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